तरुण के स्वप्न (गद्य) – Additional Questions Class 8 Hindi Kalika
🥇 खंड 1: अति लघु उत्तरीय प्रश्न (1 Mark Questions) - 20 Questions
प्र 1. 'तरुण के स्वप्न' पाठ के लेखक कौन हैं?
उत्तर: इस पाठ के लेखक 'सुभाषचंद्र बोस' हैं। 😊
प्र 2. पूरे देश में सुभाषचंद्र बोस को किस नाम से जाना जाता है?
उत्तर: उन्हें 'नेताजी' के नाम से जाना जाता है। 😊
प्र 3. सुभाषचंद्र बोस का जन्म ओड़िशा के किस नगर में हुआ था?
उत्तर: उनका जन्म 'कटक' नगर में हुआ था। 😊
प्र 4. अंग्रेज़ों को सीधी चुनौती देने के लिए नेताजी ने किस फ़ौज का गठन किया था?
उत्तर: उन्होंने 'आज़ाद हिंद फ़ौज' का गठन किया था। 😊
प्र 5. पाठ में नेताजी के किस 'स्वर्गीय नेता' का ज़िक्र किया गया है?
उत्तर: स्वर्गीय 'देशबंधु चित्तरंजन दास' का ज़िक्र किया गया है। 😊
प्र 6. चित्तरंजन दास जी की शक्ति का 'उत्स' (स्रोत) क्या था?
उत्तर: उनका देखा हुआ महान 'स्वप्न' ही उनकी शक्ति का उत्स था। 😊
प्र 7. देशबंधु चित्तरंजन दास के स्वप्न के उत्तराधिकारी आज कौन हैं?
उत्तर: आज 'हम' (देश के तरुण/युवा) उनके स्वप्न के उत्तराधिकारी हैं। 😊
प्र 8. नेताजी कैसा समाज चाहते हैं?
उत्तर: नेताजी एक नया, सर्वांगीण, स्वाधीन और संपन्न समाज चाहते हैं। 😊
प्र 9. आदर्श समाज में किस भेदभाव का स्थान नहीं होना चाहिए?
उत्तर: आदर्श समाज में 'जातिभेद' का कोई स्थान नहीं होना चाहिए। 😊
प्र 10. आदर्श समाज में नारी को किसके समान अधिकार मिलने चाहिए?
उत्तर: नारी को 'पुरुषों के समान' अधिकार मिलने चाहिए। 😊
प्र 11. नेताजी के अनुसार समाज में किसकी विषमता (असमानता) नहीं होनी चाहिए?
उत्तर: समाज में 'अर्थ' (धन-संपत्ति) की विषमता नहीं होनी चाहिए। 😊
प्र 12. प्रत्येक व्यक्ति को किसका समान अवसर (सुअवसर) मिलना चाहिए?
उत्तर: प्रत्येक व्यक्ति को 'शिक्षा और उन्नति' का समान अवसर मिलना चाहिए। 😊
प्र 13. जिस समाज में श्रम और कर्म की मर्यादा होगी, वहाँ किसके लिए स्थान नहीं रहेगा?
उत्तर: वहाँ 'आलसी और अकर्मण्य' लोगों के लिए कोई स्थान नहीं रहेगा। 😊
प्र 14. आदर्श राष्ट्र किस प्रभाव से मुक्त रहेगा?
उत्तर: आदर्श राष्ट्र हर प्रकार के 'विजातीय प्रभाव' से मुक्त रहेगा। 😊
प्र 15. भारत विश्व-मानव के समक्ष किस रूप में गण्य (परिचित) होगा?
उत्तर: भारत एक 'आदर्श-समाज और आदर्श-राष्ट्र' के रूप में गण्य होगा। 😊
प्र 16. नेताजी का स्वप्न उनके लिए कैसा सत्य है?
उत्तर: यह उनके लिए 'नित्य एवं अखंड सत्य' है। 😊
प्र 17. इस स्वप्न को सार्थक बनाने के लिए प्राण देना किसके समान है?
उत्तर: प्राण देना 'स्वर्ग समान' है। 😊
प्र 18. नेताजी तरुण भाइयों को उपहारस्वरूप क्या देते हैं?
उत्तर: नेताजी उन्हें अपना महान 'स्वप्न' उपहारस्वरूप देते हैं। 😊
प्र 19. नेताजी ने सैनिकों को कौन सा प्रसिद्ध नारा दिया था?
उत्तर: उन्होंने 'दिल्ली चलो' और 'जयहिंद' का नारा दिया था। 😊
प्र 20. 'अकर्मण्य' शब्द का क्या अर्थ है?
उत्तर: 'अकर्मण्य' का अर्थ 'निकम्मा' या 'जो काम न करे' (आलसी) है। 😊
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🥈 खंड 2: लघु उत्तरीय प्रश्न (2 Marks Questions) - 15 Questions
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प्र 1. सुभाषचंद्र बोस का मुख्य उद्देश्य क्या था और इसके लिए उन्हें क्या सहना पड़ा?
उत्तर: उनका मुख्य उद्देश्य भारत को अंग्रेज़ों के शासन से मुक्त करना था। इस कड़े संघर्ष के कारण उन्हें कई बार जेल की यातनाएँ भी सहनी पड़ीं। 🌸
प्र 2. "तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूँगा" - यह नारा किसने और क्यों दिया?
उत्तर: यह नारा नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने देशवासियों और सैनिकों में जोश भरने तथा देश की आज़ादी के लिए सर्वस्व न्योछावर करने की प्रेरणा देने के लिए दिया था। 🌸
प्र 3. स्वर्गीय देशबंधु चित्तरंजन दास का स्वप्न उनके जीवन में क्या महत्व रखता था?
उत्तर: उनका स्वप्न ही उनके जीवन की ऊर्जा था। वह स्वप्न ही उनकी शक्ति का मुख्य स्रोत (उत्स) बना और उनके आनंद (खुशी) का निर्झर (झरना) रहा। 🌸
प्र 4. हम उस महान स्वप्न से कैसे जुड़े हुए हैं?
उत्तर: नेताजी कहते हैं कि हम उस महान नेता (चित्तरंजन दास) के स्वप्न के उत्तराधिकारी हैं। उसी स्वप्न की प्रेरणा से हम अपने दिन-रात के सारे काम, भाषण और संघर्ष करते हैं। 🌸
प्र 5. नेताजी के आदर्श समाज में व्यक्ति की स्थिति कैसी होनी चाहिए?
उत्तर: उस आदर्श समाज में प्रत्येक व्यक्ति सभी दृष्टियों (विचार, कर्म) से पूरी तरह मुक्त और आज़ाद होना चाहिए और वह समाज के किसी भी दबाव से घुटे या मरे नहीं। 🌸
प्र 6. आदर्श समाज में नारी की स्वतंत्रता और अधिकार पर नेताजी के क्या विचार थे?
उत्तर: नेताजी मानते थे कि नारी पूरी तरह से मुक्त होनी चाहिए। उसे समाज और राष्ट्र के पुरुषों के समान ही अधिकार मिलने चाहिए और राष्ट्र की सेवा में भी उसे समान रूप से हिस्सा लेना चाहिए। 🌸
प्र 7. 'अर्थ की विषमता न हो' - इसका क्या तात्पर्य है?
उत्तर: इसका तात्पर्य यह है कि समाज में अमीर और गरीब के बीच धन की बड़ी खाई (असमानता) नहीं होनी चाहिए। देश की संपत्ति और साधनों पर सबका समान अधिकार होना चाहिए। 🌸
प्र 8. शिक्षा और उन्नति के विषय में नेताजी का स्वप्न क्या था?
उत्तर: उनका स्वप्न था कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति, चाहे वह किसी भी वर्ग का हो, को अच्छी शिक्षा प्राप्त करने और जीवन में आगे बढ़ने (उन्नति) के समान अवसर (सुअवसर) मिलें। 🌸
प्र 9. समाज में 'श्रम और कर्म की मर्यादा' का क्या अर्थ है?
उत्तर: इसका अर्थ है कि मेहनत करने वाले हर व्यक्ति और उसके काम का पूरा सम्मान होना चाहिए। कोई भी काम छोटा-बड़ा नहीं होता, पसीना बहाने वालों को समाज में ऊँचा स्थान मिलना चाहिए। 🌸
प्र 10. नेताजी के समाज में 'आलसी और अकर्मण्य' के लिए स्थान क्यों नहीं है?
उत्तर: क्योंकि जो समाज श्रम और मेहनत का सम्मान करता है, वह विकास करता है। निकम्मे और कामचोर लोग देश पर बोझ होते हैं, इसलिए एक कर्मठ राष्ट्र में उनके लिए कोई जगह नहीं होती। 🌸
प्र 11. राष्ट्र को 'विजातीय प्रभाव' से मुक्त रखने का क्या आशय है?
उत्तर: विजातीय प्रभाव का अर्थ है बाहरी, विदेशी या हमारी संस्कृति के विरुद्ध प्रभाव। नेताजी चाहते थे कि हमारा राष्ट्र अपनी स्वदेशी पहचान पर गर्व करे और बाहरी कुप्रभावों से मुक्त रहे। 🌸
प्र 12. भारतवर्ष विश्व-मानव के लिए क्या मिसाल पेश करेगा?
उत्तर: जब भारत अपने लोगों की सभी कमियों (अभाव) को दूर कर लेगा और समानता ले आएगा, तब वह पूरी दुनिया (विश्व-मानव) के सामने एक श्रेष्ठ 'आदर्श-समाज' और 'आदर्श-राष्ट्र' की मिसाल पेश करेगा। 🌸
प्र 13. "यह स्वप्न मेरे समक्ष नित्य एवं अखंड सत्य है।" - नेताजी ने ऐसा क्यों कहा?
उत्तर: नेताजी को पूर्ण विश्वास था कि भारत एक दिन आज़ाद और महान बनेगा। यह सिर्फ एक कल्पना नहीं थी, बल्कि उनके जीवन का सबसे बड़ा और न टूटने वाला (अखंड) लक्ष्य और सत्य था। 🌸
प्र 14. अखंड सत्य की प्रतिष्ठा के लिए नेताजी क्या करने को तैयार हैं?
उत्तर: इस सत्य की प्रतिष्ठा (सम्मान) के लिए नेताजी अपना सब कुछ न्योछावर करने, हर प्रकार का संकट सहने और यहाँ तक कि अपने प्राणों का बलिदान देने के लिए भी तैयार हैं। 🌸
प्र 15. नेताजी ने अपना स्वप्न तरुणों को ही उपहार में क्यों दिया?
उत्तर: क्योंकि तरुण (युवा) देश का भविष्य होते हैं और उनमें असीम ऊर्जा होती है। नेताजी जानते थे कि यह महान स्वप्न ही युवाओं को देश के लिए कुछ कर गुज़रने की असीम शक्ति और आनंद प्रदान करेगा। 🌸
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🏅 खंड 3: दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (4 Marks Questions) - 5 Questions
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प्र 1. नेताजी सुभाषचंद्र बोस द्वारा देखे गए 'आदर्श समाज' की क्या-क्या प्रमुख विशेषताएँ हैं? गद्यांश के आधार पर विस्तार से लिखिए।
उत्तर:
नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने एक ऐसे सर्वांगीण और संपन्न समाज का स्वप्न देखा था, जिसकी निम्नलिखित विशेषताएँ हैं:
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समानता और स्वतंत्रता: समाज में किसी भी प्रकार का जातिभेद नहीं होगा और प्रत्येक व्यक्ति समाज के अनुचित दबावों से पूरी तरह मुक्त होगा।
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नारी सशक्तिकरण: नारियों को पुरुषों के समान हर क्षेत्र में अधिकार मिलेगा और वे राष्ट्र की सेवा में समान रूप से हिस्सा लेंगी।
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आर्थिक व शैक्षिक समानता: समाज में अर्थ (धन) की कोई विषमता नहीं होगी और सभी को शिक्षा तथा उन्नति करने के समान अवसर प्राप्त होंगे।
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श्रम का सम्मान: उस समाज में मेहनत और कर्म की पूरी मर्यादा होगी और कामचोर या आलसी लोगों के लिए कोई जगह नहीं होगी। 🌟
प्र 2. "मरण है स्वर्ग समान" - नेताजी ने ऐसा किस विशेष संदर्भ में कहा है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
नेताजी का पूरा जीवन भारत माता को अंग्रेज़ों की गुलामी से मुक्त कराने और एक आदर्श राष्ट्र के निर्माण के लिए समर्पित था। यह स्वप्न उनके लिए एक 'अखंड सत्य' था।
उन्होंने यह वाक्य इस संदर्भ में कहा है कि देश की आज़ादी और इस महान सत्य की प्रतिष्ठा के लिए हर संकट सहा जा सकता है और हर त्याग किया जा सकता है। संघर्ष के इस पवित्र मार्ग पर चलते हुए यदि एक क्रांतिकारी को अपने प्राण भी गँवाने पड़ें, तो वह कोई साधारण मृत्यु नहीं है। देश के लिए दिया गया वह बलिदान इतना महान और गौरवशाली है कि वह मृत्यु भी 'स्वर्ग' के समान सुखदायी और पवित्र है। 🌟
प्र 3. 'तरुण के स्वप्न' पाठ के आधार पर स्पष्ट करें कि नेताजी का यह स्वप्न विश्व-मानव (पूरी दुनिया) के लिए कैसे एक मिसाल बनेगा?
उत्तर:
नेताजी का मानना था कि जब हमारा राष्ट्र स्वदेशी विचारों और यंत्रों के आधार पर काम करेगा, तो वह सबसे पहले भारतवासियों की गरीबी, असमानता और अशिक्षा जैसे अभावों को मिटाएगा।
जब भारत में एक ऐसा समाज स्थापित हो जाएगा जहाँ न जातिभेद हो, न धन की विषमता हो, जहाँ नारी का पूरा सम्मान हो और जहाँ केवल कर्म की पूजा हो, तो यह केवल भारत के लिए ही गर्व की बात नहीं होगी। यह एक ऐसा श्रेष्ठ 'मॉडल' होगा जिसे देखकर पूरी दुनिया प्रेरित होगी। भारत का यह स्वरूप 'विश्व-मानव' के सामने एक 'आदर्श-समाज' और 'आदर्श-राष्ट्र' के रूप में गिना जाएगा, जो पूरी मानव जाति को सही दिशा दिखाएगा। 🌟
प्र 4. देशबंधु चित्तरंजन दास के स्वप्न का नेताजी और हमारे दैनिक जीवन (कर्म) पर क्या प्रभाव है? पाठ के आधार पर समझाइए।
उत्तर:
स्वर्गीय देशबंधु चित्तरंजन दास नेताजी के राजनीतिक गुरु और आदर्श थे। उनका जो देश की स्वाधीनता का स्वप्न था, वही उनकी शक्ति का 'उत्स' (स्रोत) और आनंद का 'निर्झर' था।
नेताजी कहते हैं कि उस महान नेता के जाने के बाद आज हम (देश के तरुण) उस स्वप्न के सच्चे उत्तराधिकारी हैं। यह स्वप्न कोई मृत विचार नहीं है, बल्कि एक जीवंत ऊर्जा है। इसी स्वप्न की महान प्रेरणा से ही हमारे जीवन का हर काम संचालित होता है। हम इसी प्रेरणा से उठते-बैठते हैं, चलते-फिरते हैं, लिखते हैं, अपने भाषण देते हैं और देश सेवा का हर काम-काज करते हैं। यह स्वप्न हमारे जीवन का मार्गदर्शक है। 🌟
प्र 5. "हे मेरे तरुण भाइयो! तुम्हें देने लायक मेरे पास कुछ भी नहीं है..." नेताजी ने ऐसा क्यों कहा और इस उपहार के माध्यम से वे युवाओं से क्या अपेक्षा रखते हैं?
उत्तर:
नेताजी ने ऐसा इसलिए कहा क्योंकि एक सच्चा स्वतंत्रता सेनानी भौतिक धन, दौलत या सुख-सुविधाओं का संचय नहीं करता। उनके पास युवाओं को देने के लिए कोई सांसारिक संपत्ति नहीं थी।
उनके पास केवल अपना वह 'महान स्वप्न' था जिसने उनके अपने क्षुद्र (साधारण) जीवन को भी सार्थक और महान बना दिया था। वे इस स्वप्न को युवाओं को 'उपहारस्वरूप' देते हैं। इस उपहार के माध्यम से वे युवाओं से यह अपेक्षा करते हैं कि वे इस स्वप्न को सहर्ष स्वीकार करें, क्योंकि यही स्वप्न उन्हें देश के लिए लड़ने की 'असीम शक्ति' और बलिदान होने का 'अपार आनंद' देगा। वे चाहते हैं कि युवा इस स्वप्न को अपनाकर देश के नवनिर्माण में जुट जाएँ। 🌟